हर्ष की पगडंडी पर
क्लेष का तांडव क्यों करता है
क्या ये हर्ष
तेरे घर की और नहीं मुड़ता है
पगडंडिया
ऊबड़ खाबड़ रास्ते पर भी
सरल और शालिन हो जाती हैं
क्या पगडंडियों का संघर्ष
तुम्हें नहीं दिखता है
लोलुपता की लस-लसाहट
मे हमेशा चिपका मिलता है
चंदे मे कमाई चाटुकारिता से
ही रीझता है
चल छोड़, मुझे क्या ?
कहना चाहता हूँ , नहीं कह पाता
हमेशा तुझसे टकराता हूँ
हर्ष की पगडंडी पर
फिर क्लेष का तांडव होता है
गुनेश्वर
क्लेष का तांडव क्यों करता है
क्या ये हर्ष
तेरे घर की और नहीं मुड़ता है
पगडंडिया
ऊबड़ खाबड़ रास्ते पर भी
सरल और शालिन हो जाती हैं
क्या पगडंडियों का संघर्ष
तुम्हें नहीं दिखता है
लोलुपता की लस-लसाहट
मे हमेशा चिपका मिलता है
चंदे मे कमाई चाटुकारिता से
ही रीझता है
चल छोड़, मुझे क्या ?
कहना चाहता हूँ , नहीं कह पाता
हमेशा तुझसे टकराता हूँ
हर्ष की पगडंडी पर
फिर क्लेष का तांडव होता है
गुनेश्वर
No comments:
Post a Comment