Wednesday, 30 October 2013

ईद मनाने दे
धड़कने दे आज फिर इस दिल को
ईद की वो मूलकाते याद आने दे
साँसों मे महकती तेरी ज़ुल्फों को
दिल मे फिर आज उतर जाने दे
शीतल हवा के पुरसुकून झोकें से
पलकों को मेरा रिस्ता निभाने दे
ईद की वो मुलाकातें याद आने दे
छनकती तेरी पायल की वो गुंजन
होंठों पर नया इक गीत सजाने दे
स्पर्श के पांखुरी से फिर महकाने दे
तेरी यादों मे फिर से ईद मनाने दे
मुझे ईद मनाने दे
मुझे ईद मनाने दे
अपने ख्वाबों मे फिर मुझे आने दे
गुनेश्वर

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