तुम खामोश रहने लगे हो
दहेज की कमी से
और मैं अपने माँ बाप को
छोड़ आई हूँ
अपनी खुशियों की पराकाष्ठा का चलचित्र दिखा कर
यदि तुम्हें लगता है
अर्थ , ज्यादा जरूरी है
मेरी ज़िम्मेदारी तुम्हारी कोई मजबूरी है
बेशक बेझिझक चले जाओ
माँ बाप ने
इतना तो कर ही दिया था
ज्ञान की कुंजी
शिक्षा की पूंजी
मुझे समय रहते दिला दिया |||||
और मैं स्वाभिमानी हूँ ,, निसंदेह
इसलिए
तुम्हारी जूतों की नोक पर
न बाबा न
चाहो तो तुम मेरे साथ रह सकते हो
मैं तुम्हें पाल लूँगी
बशर्ते तुम्हारे ""मैं""" की मौत न हो जाये
ओहो ----------मैं तो भूल ही गई
तुममे """मैं """ बचा ही कहाँ है
चलो घर चलो ,,, कल से तुम मेरी सहज और शालिन ज़िम्मेदारी हो
तुम्हारी सामाजिक पत्नी ,,, खुले मन से न्योता है
कोई डिमांड नहीं है मेरा
आओ चलते क्या ?????
गुनेश्वर
दहेज की कमी से
और मैं अपने माँ बाप को
छोड़ आई हूँ
अपनी खुशियों की पराकाष्ठा का चलचित्र दिखा कर
यदि तुम्हें लगता है
अर्थ , ज्यादा जरूरी है
मेरी ज़िम्मेदारी तुम्हारी कोई मजबूरी है
बेशक बेझिझक चले जाओ
माँ बाप ने
इतना तो कर ही दिया था
ज्ञान की कुंजी
शिक्षा की पूंजी
मुझे समय रहते दिला दिया |||||
और मैं स्वाभिमानी हूँ ,, निसंदेह
इसलिए
तुम्हारी जूतों की नोक पर
न बाबा न
चाहो तो तुम मेरे साथ रह सकते हो
मैं तुम्हें पाल लूँगी
बशर्ते तुम्हारे ""मैं""" की मौत न हो जाये
ओहो ----------मैं तो भूल ही गई
तुममे """मैं """ बचा ही कहाँ है
चलो घर चलो ,,, कल से तुम मेरी सहज और शालिन ज़िम्मेदारी हो
तुम्हारी सामाजिक पत्नी ,,, खुले मन से न्योता है
कोई डिमांड नहीं है मेरा
आओ चलते क्या ?????
गुनेश्वर
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