गीत
अपने भीगे-भीगे होठों से छूकर देना
जो खत तुम्हें भेजा था पढ़ कर देना ||
लेना अपने हाथों, चाहता का दर्पण
देना मुझे अपनी निशानियाँ देना ||
-------- जो खत तुम्हें भेजा था पढ़ कर देना ||
है इंतेजार तुझे इक हँसी शाम की
उस हँसी शाम की कहानियाँ देना ||
-------- अपने भीगे-भीगे होठों से छूकर देना
-------- जो खत तुम्हें भेजा था पढ़ कर देना ||
न गुजर जाए छूकर उदासी का मंजर
मुझे अपनी सारी परेशानियाँ देना ||
रहना तुम अपने प्यार के मंदिर मे
मुझे सारी अपनी नदानियाँ देना||
--------.अपने भीगे-भीगे होठों से छूकर देना
--------जो खत तुम्हें भेजा था पढ़ कर देना ||
अपने भीगे-भीगे होठों से छूकर देना …………………..
गुनेश्वर
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