Monday, 1 July 2013

तुम लेकर चलना मेरी अर्थी

तुम लेकर चलना मेरी अर्थी
पर जरा ध्यान से
तुम्हारे कांधे न दुखें,
अगर दुखे ,
कांधे बदल लेना

कुछ और भी हिसाब है
जीवन का ,
हो सके तो निबाह लेना
माँ को प्यार से रखना
और समझा लेना |

चाहता था वो भी साथ चले
पर ये मेरे बस मे नहीं

ऊपरवाला हमेशा बच्चो
पर आशीर्वाद बनाए रखता है |

और हाँ, कुछ जरूरी काम
और भी है
कुछ जरूरी सामान
मेरे इस बेजान जिस्म के साथ
दफन न हो जाए
ये वादा चाहता हूँ |

दिल , गुर्दा , आँख
किनही दोस्तों के काम आए
तो निःसंकोच
अपना समझना

हो सकता है
ये मेरा अपना व्यक्तिगत
स्वार्थ हो

मै हमेशा तुम्हें
देखना चाहता हूँ ,
तुम्हारे लिए धड़कना चाहता हूँ||||

तुम्हारा अपना
जिसे तुम पापा कहते हो ||||||

अपना गुनेश्वर

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