आजकल नो-निहालों के लिए तैयार किए गए देख-रेख गृह
और उसके बाद की स्थिति के प्रति एक संवेदना
खिलोनों की भीड़ मे
सभ्यता खोजती
आधुनिकता
ये छौने छौने खिलौने
मदमस्त अपनी दुनिया मे
कभी रोते कभी मुसकुराते
सब कुछ बाँट लेते
कोई पालन नहीं होता
रोबोट के सिखाये गए
नियमो का
अचानक एक रोबोट आता
एक खिलौना उठाता
खिचता घसीटता
चिंघाडता और चिचियाता
और उसमे सभ्यता ढूँढता
पर उसे सभ्यता नहीं मिलती
एक निश्छल हंसी,बेखबर
आठ से दस घंटे रोबोटो की अनुपस्थिति
खिलौने मन मे भ्रम पाले आजादी का
निश्छल हंसी ,
तमाम सभ्यता , समाजिकता से परे
खिलोनों की भीड़ मे
सभ्यता खोजती
आधुनिकता |||||||
और उसके बाद की स्थिति के प्रति एक संवेदना
खिलोनों की भीड़ मे
सभ्यता खोजती
आधुनिकता
ये छौने छौने खिलौने
मदमस्त अपनी दुनिया मे
कभी रोते कभी मुसकुराते
सब कुछ बाँट लेते
कोई पालन नहीं होता
रोबोट के सिखाये गए
नियमो का
अचानक एक रोबोट आता
एक खिलौना उठाता
खिचता घसीटता
चिंघाडता और चिचियाता
और उसमे सभ्यता ढूँढता
पर उसे सभ्यता नहीं मिलती
एक निश्छल हंसी,बेखबर
आठ से दस घंटे रोबोटो की अनुपस्थिति
खिलौने मन मे भ्रम पाले आजादी का
निश्छल हंसी ,
तमाम सभ्यता , समाजिकता से परे
खिलोनों की भीड़ मे
सभ्यता खोजती
आधुनिकता |||||||
No comments:
Post a Comment