प्यार से उसने मुझे बुलाया
होले से दस्तक दी,
मुझे मेरे होने का एहसास कराया
और कह गया,
चल हट पगले
अकेले ही मरेगा क्या?
आ अपने दोस्त को भी साथ ले ले----
और मै स्वार्थी निकला |
कह गया उससे ,
चल हट पगले, रुक यंही!
मेरे साथ आ कर,
मुझे रुलाएगा क्या ?
मेरे बाद बच्चों को
मेरी कहानी मेरी कविता
नहीं, सुनाएगा क्या ?
उसने कहा तू तो बड़ा स्वार्थी निकला
अकेले ही जन्नत जाना चाहता है
और मुझे इस दोज़ख मे छोड़
जाना चाहता है ||||
मैंने कहा ये तो मेरे लिए जरूरी है
तुम सब को छोड़ जाना मजबूरी है ||
ऊपर क्या है पता नहीं |
पर
यंहा तो तुझे पूरी कायनात
और बच्चो की जन्नत दे रहा हूँ ||
जी ले उनमे अपना बचपन , मेरा बचपन
हम सबका बचपन..................
गुनेश्वर
होले से दस्तक दी,
मुझे मेरे होने का एहसास कराया
और कह गया,
चल हट पगले
अकेले ही मरेगा क्या?
आ अपने दोस्त को भी साथ ले ले----
और मै स्वार्थी निकला |
कह गया उससे ,
चल हट पगले, रुक यंही!
मेरे साथ आ कर,
मुझे रुलाएगा क्या ?
मेरे बाद बच्चों को
मेरी कहानी मेरी कविता
नहीं, सुनाएगा क्या ?
उसने कहा तू तो बड़ा स्वार्थी निकला
अकेले ही जन्नत जाना चाहता है
और मुझे इस दोज़ख मे छोड़
जाना चाहता है ||||
मैंने कहा ये तो मेरे लिए जरूरी है
तुम सब को छोड़ जाना मजबूरी है ||
ऊपर क्या है पता नहीं |
पर
यंहा तो तुझे पूरी कायनात
और बच्चो की जन्नत दे रहा हूँ ||
जी ले उनमे अपना बचपन , मेरा बचपन
हम सबका बचपन..................
गुनेश्वर
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