Monday, 1 July 2013

प्यार से उसने मुझे बुलाया

प्यार से उसने मुझे बुलाया
होले से दस्तक दी,
मुझे मेरे होने का एहसास कराया
और कह गया,
चल हट पगले
अकेले ही मरेगा क्या?
आ अपने दोस्त को भी साथ ले ले----

और मै स्वार्थी निकला |
कह गया उससे ,
चल हट पगले, रुक यंही!
मेरे साथ आ कर,
मुझे रुलाएगा क्या ?

मेरे बाद बच्चों को
मेरी कहानी मेरी कविता
नहीं, सुनाएगा क्या ?

उसने कहा तू तो बड़ा स्वार्थी निकला
अकेले ही जन्नत जाना चाहता है
और मुझे इस दोज़ख मे छोड़
जाना चाहता है ||||

मैंने कहा ये तो मेरे लिए जरूरी है
तुम सब को छोड़ जाना मजबूरी है ||

ऊपर क्या है पता नहीं |
पर
यंहा तो तुझे पूरी कायनात
और बच्चो की जन्नत दे रहा हूँ ||
जी ले उनमे अपना बचपन , मेरा बचपन
हम सबका बचपन..................

गुनेश्वर

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