Monday, 1 July 2013

अदभूत पहेली

अदभूत पहेली
करवट बदलती आजकल बस्तियाँ
-मान मन्नवल और वो मस्तियाँ
-विश्वास खोती आज ये हस्तियाँ
--------------कंक्रीट सी शब्दावली
--------------धोखा और आड्म्बर
------घुप्प अंधेरे का वो लालटेन
------परछाईं पहचानती पत्नियाँ

कहाँ खोजूँ---------मिलेगा क्या??
व्यवस्था की नाड़ी चरमराती हुई
बल्त्कृता को तड़पाती हुई
भूख सूख चुका है आज भूख से
-------------------मृत्युभोज खाते
पाखंडी
चाटुकारिता मे झुकती जाती
स्वांस-दर स्वांस ,,, ‘’’’’’’’’’’’’’
!!!!!!!!!!
रोने को कुछ भी नहीं बाकी
ढोने को बहुत कुछ
!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
मर जाऊँगा, राख़ गंगा मे न
बहाना , मिट्टी मे दबा देना वरना
मेरे हिस्से का मैलापन बह कर
और विस्तृत होगा ,,, खत्म कर दो
बस यहीं ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||

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