भरी भीड़ मे, मुझे खोजना
अकेले ही मिलुंगा, तुम्हारी आस लिए
खड़ी न रहना कंही किनारे,
मै और भी अकेला हो जाऊगा
कोशिश करना
अपनी पुरानी स्मृत्यों के
कुछ अनसुलझे पट खोल
तलाशने की मुझे |अपने घर की
सामने वाली दीवार भी देखना
तुम्हारी एक तस्वीर होगी
आलता लगाए मेरे आँगन मे
बचपन की,
और मैं कंही पेड़ के पीछे
छिपा हुआ ,
अब तक छिपा हुआ हूँ,
अकेला भीड़ मे
और भी कई यादों की झाकियाँ है
शायद तुम्हें याद हो
उछलते पत्थरों का
पानी की सतह पर
और तुम्हारा वो मुसकराना
मैं कुछ भी नहीं भुला
छम-छम करती तुम्हारी वो पाजेब
पिताजी के जेब से पैसे चुरा कर
तुम्हारे लिए उपहार लाया था
और अगले दिन तुमने मुझसे
पूछा था यूँ उदास क्यों हो
मैं कैसे बताता पापा की बेत का दर्द
और तुम चली गई
कई यादों की हमदर्द शामे देकर
फिर जीवन के कई सोपान बीते
और मैं एकाकी होता गया
यादों के साथ तुम्हारे
और फिर जब देखा तुम्हें
पाया तुम भी एकाकी
कोई हमदर्दी नहीं देना चाहता तुम्हें
तुम मेरे वही पुरानी स्मृति हो
मै अब भी पूरी भीड़ के साथ
सिर्फ तुम्हारे लिए
अकेला खड़ा हूँ
आओ बाँट ले एकाकीपन अपना
अब और मत रुलाओ
अकेले ही मिलुंगा, तुम्हारी आस लिए
खड़ी न रहना कंही किनारे,
मै और भी अकेला हो जाऊगा
कोशिश करना
अपनी पुरानी स्मृत्यों के
कुछ अनसुलझे पट खोल
तलाशने की मुझे |अपने घर की
सामने वाली दीवार भी देखना
तुम्हारी एक तस्वीर होगी
आलता लगाए मेरे आँगन मे
बचपन की,
और मैं कंही पेड़ के पीछे
छिपा हुआ ,
अब तक छिपा हुआ हूँ,
अकेला भीड़ मे
और भी कई यादों की झाकियाँ है
शायद तुम्हें याद हो
उछलते पत्थरों का
पानी की सतह पर
और तुम्हारा वो मुसकराना
मैं कुछ भी नहीं भुला
छम-छम करती तुम्हारी वो पाजेब
पिताजी के जेब से पैसे चुरा कर
तुम्हारे लिए उपहार लाया था
और अगले दिन तुमने मुझसे
पूछा था यूँ उदास क्यों हो
मैं कैसे बताता पापा की बेत का दर्द
और तुम चली गई
कई यादों की हमदर्द शामे देकर
फिर जीवन के कई सोपान बीते
और मैं एकाकी होता गया
यादों के साथ तुम्हारे
और फिर जब देखा तुम्हें
पाया तुम भी एकाकी
कोई हमदर्दी नहीं देना चाहता तुम्हें
तुम मेरे वही पुरानी स्मृति हो
मै अब भी पूरी भीड़ के साथ
सिर्फ तुम्हारे लिए
अकेला खड़ा हूँ
आओ बाँट ले एकाकीपन अपना
अब और मत रुलाओ
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