मेरी सुबह
किताब के पन्नो पर
ओस की बुँदे
चश्मे का नंबर
बदलता सा लगा
बेटा
आज जरा दवाखाना
चलना है
अच्छा जी;;;;;;;
बहु जरा मेरा
शाल निकल देना
क्या बात बहु
बहुत जल्द ही
रोशनी कर दी
समय जो हा गया
पिताजी
क्या परिवेश नहीं आया
वो तो खा कर सो गए
चश्मे का नंबर
मन के अंदर
कंही पुरानी
स्मृतियाँ
तह किये पत्र
और वो बिता हुआ सुख
चली तो गयी
अकेले
जिद्द थी उसकी
सुहागन ही जाउंगी
खोजने लगा
स्मृति पटल में
बिखरे वो ख़त
इस बीच कोई रद्दी
वाला तो नहीं आया
ऊपर अटारी पर
एक संदूक थी
संदूक
कुछ पुरानी यादें
बच्चो के नाल
जो की सुखाकर
कपडे में बांध
पोटली बना रख रख्खा था
मेरी सुहागन की खुशबु थी उसमे
वाह मिल गए वो ख़त
कितनी सांसों का हिसाब
कितने प्यार भरी बातों का जवाब
मेरी सुबह
ख़त के पन्नो पर
ओस की बुँदे
चश्मे का नंबर
बदलता सा लगा
बहु इन खतों को
जरा पढ़ तो दे-------------
आप भी न पिताजी
क्या क्या फर्माइश
पूरी करेगी
अकेली जान
क्या रद्दी उठा कर
बैठ जातें हैं ।
मुझे साथ लेकर जाती
अकेले ही चली गयी
चश्मे का नंबर
जरुरत नहीं अब तो
मैंने सिरहाने की दिशा जो बदल ली है।
गुनेश्वर
किताब के पन्नो पर
ओस की बुँदे
चश्मे का नंबर
बदलता सा लगा
बेटा
आज जरा दवाखाना
चलना है
अच्छा जी;;;;;;;
बहु जरा मेरा
शाल निकल देना
क्या बात बहु
बहुत जल्द ही
रोशनी कर दी
समय जो हा गया
पिताजी
क्या परिवेश नहीं आया
वो तो खा कर सो गए
चश्मे का नंबर
मन के अंदर
कंही पुरानी
स्मृतियाँ
तह किये पत्र
और वो बिता हुआ सुख
चली तो गयी
अकेले
जिद्द थी उसकी
सुहागन ही जाउंगी
खोजने लगा
स्मृति पटल में
बिखरे वो ख़त
इस बीच कोई रद्दी
वाला तो नहीं आया
ऊपर अटारी पर
एक संदूक थी
संदूक
कुछ पुरानी यादें
बच्चो के नाल
जो की सुखाकर
कपडे में बांध
पोटली बना रख रख्खा था
मेरी सुहागन की खुशबु थी उसमे
वाह मिल गए वो ख़त
कितनी सांसों का हिसाब
कितने प्यार भरी बातों का जवाब
मेरी सुबह
ख़त के पन्नो पर
ओस की बुँदे
चश्मे का नंबर
बदलता सा लगा
बहु इन खतों को
जरा पढ़ तो दे-------------
आप भी न पिताजी
क्या क्या फर्माइश
पूरी करेगी
अकेली जान
क्या रद्दी उठा कर
बैठ जातें हैं ।
मुझे साथ लेकर जाती
अकेले ही चली गयी
चश्मे का नंबर
जरुरत नहीं अब तो
मैंने सिरहाने की दिशा जो बदल ली है।
गुनेश्वर
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