Tuesday, 2 July 2013

एक बात मुझे कहनी है

एक बात मुझे कहनी है
दिल की दरिया आज ही
-------------------बहनी है
---सूखे शब्दों से अब श्रिंगार नहीं होता
-पथरीली आँखों मे भी प्यार नहीं होता
... चहकती चिड़िया भी उद्वेलित करती है
-कोरे कोरे लफ्जों से इकरार नहीं होता

एक बात मुझे कहनी है
दिल की दरिया आज ही
-------------------बहनी है
_____ख़ाबों मे रहकर भी संसार नहीं होता
दरख्तों मे एक जोड़े का व्यवहार नहीं होता
कोमल कोमल डाली टूटती बेआवाज अब तो
ज़िंदगी के इसक्रम मे कोई संस्कार नहीं होता

एक बात मुझे कहनी है
दिल की दरिया आज ही
-------------------बहनी है
अब तो पाहून का भी सत्कार नहीं होता
गूड़ के ढेली, पानी का भी सार नहीं होता
रौद्र रूप रखता है,अब,कोमल था मन जो
गौ के पुजन का अब संस्कार नहीं होता

एक बात मुझे कहनी है
दिल की दरिया आज ही
-------------------बहनी है
बुजुर्गों के पाँव दबा दे जिम्मेदार नहीं होता
अपच है खान-पान, दूध का धार नहीं होता
मवेशियाँ हड्डियों का ढाँचा मात्र रह जाती है
हरी पत्तियाँ और घास का किरदार नहीं होता

एक बात मुझे कहनी है
कई बात मुझे कहनी है
दिल की दरिया आज ही
-------------------बहनी है
दिल की दरिया आज ही
-------------------बहनी है

गुनेश्वर

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