अपने अधरों को खोलो
कुछ मीठे प्यारे शब्द तो बोलो
किस बगिया कि कली हो
किसके चौखट पर पली हो
सुंदर हो सुसंस्कृत हो
फिर किसके द्वारा तिरस्कृत हो
अपने अस्तित्व को जानो
वक्त को पहचानो
सृष्टि का तुम ही आधा सच हो
तुम नारी हो देवी हो
पूजी जाती हो
फिर क्यों घबराती हो
सिमटो मत गमले मे गुलाब कि तरह
विस्तृत हो , विस्तार दो
अपने सर्वस्व को फिर से नया आकार दो
जब तक आदमी का न होगा, दंभ खत्म
तब तक तुम्हारा यू ही होता रहेगा शोषण और दमन
गुनेश्वर
कुछ मीठे प्यारे शब्द तो बोलो
किस बगिया कि कली हो
किसके चौखट पर पली हो
सुंदर हो सुसंस्कृत हो
फिर किसके द्वारा तिरस्कृत हो
अपने अस्तित्व को जानो
वक्त को पहचानो
सृष्टि का तुम ही आधा सच हो
तुम नारी हो देवी हो
पूजी जाती हो
फिर क्यों घबराती हो
सिमटो मत गमले मे गुलाब कि तरह
विस्तृत हो , विस्तार दो
अपने सर्वस्व को फिर से नया आकार दो
जब तक आदमी का न होगा, दंभ खत्म
तब तक तुम्हारा यू ही होता रहेगा शोषण और दमन
गुनेश्वर
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