फिर वही खुशी,
वही प्यार मिल जायेगा
आदमी का
आदमीयत मे होने को
अहसास मिल जायेगा
छिलने लगे थे, काँटों पर चलते-चलते
अरमानों के रास्ते
रूबरू जो तुमसे होंगे
खुशनुमा अंजाम मिल जायेगा
लम्हा-लम्हा, लम्हों की सौगात
ले के जो आओगी
फूलों को भी खिलने का
सबब मिल जायेगा
मृगतृष्णा सा जो भटक रहा था मन
मन का, मन मे होने का आभास मिल जायेगा
अब की बार खुद को रोने न दूंगा
वजूद आंसुओं मे भिगोने न दूंगा
तुम्हारे माथे पर अपनी पलकों कि
छुवन दूंगा, और झुक कर य कहूँगा
फिर वही खुशी वही प्यार दे दो
फिर से मुझे मेरे होने का अहसास दे दो
गुनेश्वर
वही प्यार मिल जायेगा
आदमी का
आदमीयत मे होने को
अहसास मिल जायेगा
छिलने लगे थे, काँटों पर चलते-चलते
अरमानों के रास्ते
रूबरू जो तुमसे होंगे
खुशनुमा अंजाम मिल जायेगा
लम्हा-लम्हा, लम्हों की सौगात
ले के जो आओगी
फूलों को भी खिलने का
सबब मिल जायेगा
मृगतृष्णा सा जो भटक रहा था मन
मन का, मन मे होने का आभास मिल जायेगा
अब की बार खुद को रोने न दूंगा
वजूद आंसुओं मे भिगोने न दूंगा
तुम्हारे माथे पर अपनी पलकों कि
छुवन दूंगा, और झुक कर य कहूँगा
फिर वही खुशी वही प्यार दे दो
फिर से मुझे मेरे होने का अहसास दे दो
गुनेश्वर
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