पिताजी की याद मे
चट्टानों की तरह लगते थे
दुखों मे हमारी
मोम की तरह पिघलते थे
... बच्चे-बच्चे की उपलब्धियों मे
खुश हो हो निखरते थे
क्या लिखू :लिख तो दूंगा मैं पूरा वृतांत
पिता से प्रेम की सारी दास्तां
कहते: पढ़ लिख कर तुम कुछ बन जाओ
जीवन मे कुछ सार्थक गढ़ जाओ
है जरूरत तुम्हारी सहृदय संदर्भों को
जीवन मे शालीनता से विचर जाओ
कहते :मैं सपनों की वो बाते नहीं कहता
प्रलापों की काटी रातें नहीं कहता
सख्त हैं मेरी मेहनतकश हड्डियाँ
किस-किसने दी घाते नहीं कहता
कहते :संघर्षों को शालीनता से तुम झेलो
सत्व अमृत सा होगा वह पी लो
खुशियाँ राह तकती मिलेंगी तब
उनसे अपना तुम दामन भीगो लो
और भी बहुत कुछ है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
और भी बहुत कुछ है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
और भी बहुत कुछ है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, ,,,,,,,,,,,,,,,,
बाउजी ,पिताजी , बाबा , पापा
आपको नमन कोटी कोटी चरण वंदन
गुनेश्वर
चट्टानों की तरह लगते थे
दुखों मे हमारी
मोम की तरह पिघलते थे
... बच्चे-बच्चे की उपलब्धियों मे
खुश हो हो निखरते थे
क्या लिखू :लिख तो दूंगा मैं पूरा वृतांत
पिता से प्रेम की सारी दास्तां
कहते: पढ़ लिख कर तुम कुछ बन जाओ
जीवन मे कुछ सार्थक गढ़ जाओ
है जरूरत तुम्हारी सहृदय संदर्भों को
जीवन मे शालीनता से विचर जाओ
कहते :मैं सपनों की वो बाते नहीं कहता
प्रलापों की काटी रातें नहीं कहता
सख्त हैं मेरी मेहनतकश हड्डियाँ
किस-किसने दी घाते नहीं कहता
कहते :संघर्षों को शालीनता से तुम झेलो
सत्व अमृत सा होगा वह पी लो
खुशियाँ राह तकती मिलेंगी तब
उनसे अपना तुम दामन भीगो लो
और भी बहुत कुछ है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
और भी बहुत कुछ है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
और भी बहुत कुछ है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
बाउजी ,पिताजी , बाबा , पापा
आपको नमन कोटी कोटी चरण वंदन
गुनेश्वर
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