कुछ शब्द घर से
निकलते हैं
कुछ दूर चलते हैं
बंद का नीनांद
गूँजता है
... बहुत मचलते हैं
कोहराम आता है
तीनको की मानिंद
उड़ा ले जाता है
क्षत विक्षित सार्थक्ता
पीड़ा से कराहती पड़ी है
चौराहे पर
“”””””आओ देखे ,,,
हम किसे वोट देंगे
फिर शब्दों को
संघर्षों मे लपेटने के लिए””””
फिर कितनी ज़िंदगियों की
आज हम पाखंडियों को
भेंट देंगे .............................
ये शब्द मेरे बच्चे हैं
कल तुम्हारे होंगे ?????????????
गुनेश्वर
निकलते हैं
कुछ दूर चलते हैं
बंद का नीनांद
गूँजता है
... बहुत मचलते हैं
कोहराम आता है
तीनको की मानिंद
उड़ा ले जाता है
क्षत विक्षित सार्थक्ता
पीड़ा से कराहती पड़ी है
चौराहे पर
“”””””आओ देखे ,,,
हम किसे वोट देंगे
फिर शब्दों को
संघर्षों मे लपेटने के लिए””””
फिर कितनी ज़िंदगियों की
आज हम पाखंडियों को
भेंट देंगे .............................
ये शब्द मेरे बच्चे हैं
कल तुम्हारे होंगे ?????????????
गुनेश्वर
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