रात हुई
रात हुई
एक पल के लिए
घुँघरू जुदा रहा पायल का
धीमे से किसिने
आज दस्तक दी
है कौन जो मेरे दिल मे समाया सा
हाँथों की लकीरों मे
गहरी साँसों मे खोजती रही
है कौन जो मुझे भरमाया सा
चाँद की ओंट मे
चाँदनी मे नहाया सा
है कौन जो मुझ पर छाया सा
तारों की परवरिश मे
हवाओं की लहरियों मे
माधुर्य का एक नया राग
है कौन जो मेरे लिए गाया सा
बारिश की बूंदों मे
चेहरा झिलमिलाया सा
गीतों की धड़कन मे
ऊमीद्दों का साया सा
है कौन मेरी आँखों के कोरों मे
प्रेम रस बरसाया सा
गालों पर तितलियों सी हँसी
बिखराया सा
होठों पर लर्जते संगीत का
अनकहा जादू समाया सा
मेरी मुद्दतों को क्षणो मे पिघलाया सा
मेरी मुद्दतों को क्षणो मे पिघलाया सा
गुनेश्वर
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