तोड़ कर तटबंधों को
मृत्यु का द्वार हमने चुना
फिर किस बात का रोना धोना
हमने खुद बना लिया जीवन एक खिलौना
कुछ शिव का तांडव कहते
कुछ कहते भगवन लीला
पलट के हमने कभी न देखा
हमने कितना दोहा और क्या क्या छिना
हरीतिमी की हदों मे
हमने डाला कंक्रीट का बिछौना
गर्व करते और, इठलाते रहे
नासमझी का देख देख भगौना
रेत दिया जिगर चट्टानों का
चटक-चटक की आवाज सुनी
निर्विवाद दुहते रहे और निचोड़ते
अपने ही अस्तित्व का कौन कौन
फिर किस बात का रोना धोना
तुमने मार पीट लिया
तुमने किया बलत्कृत
धरा का हिस्सा
बौना बौना
अब घड़ियाली टेसुए न बहावों
न करो इस तरह
अनाधिकृत रोना धोना
No comments:
Post a Comment