खोल मन की परते
बहने दे सारा कलुषित
वितृष्णा सा यदि हो रहा है जीवन |
कुछ तो बचा ले अपने लिए
ताकि जी जाये बचे हुए दिन
खोल मन की परते ---------
बहने दे सारा कलुषित
उस सोपान को तो जी लिया
अच्छा बुरा जो भी, जैसा भी
फिर चाहता हूँ जीना अपना बचपन
चाहता हूँ, तुम सब भी जी लो
अपना अपना बचपन
खोल मन की परते ---------
बहने दे सारा कलुषित
बदल डाल अन्दर के उन पुतलों को
जो भयभीत कर रहें हैं
कर किनारा
चल निकल पड़
कुछ दूर धुंध ही सही
उसकी तपन से धुंध भी छट जायेगा
Guneshwar
बहने दे सारा कलुषित
वितृष्णा सा यदि हो रहा है जीवन |
कुछ तो बचा ले अपने लिए
ताकि जी जाये बचे हुए दिन
खोल मन की परते ---------
बहने दे सारा कलुषित
उस सोपान को तो जी लिया
अच्छा बुरा जो भी, जैसा भी
फिर चाहता हूँ जीना अपना बचपन
चाहता हूँ, तुम सब भी जी लो
अपना अपना बचपन
खोल मन की परते ---------
बहने दे सारा कलुषित
बदल डाल अन्दर के उन पुतलों को
जो भयभीत कर रहें हैं
कर किनारा
चल निकल पड़
कुछ दूर धुंध ही सही
उसकी तपन से धुंध भी छट जायेगा
Guneshwar
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