देखो न तुम इस तरह मुझे
आ भी जाओ न हमसफ़र मेरे तुम
आ भी जाओ न
देखो न तुम इस तरह मुझे
हूँ अकेला बहुत मेरी धडकनों को
निभा जाओ न
देखो न तुम इस तरह मुझे
आ भी जाओ न
संभल गया हूँ बहुत
उस दौर से कभी का
मेरे भी अरमानो में
दीप जला जाओ न
मेरे भी जज्बात सजा जाओ न
मेरे एहसासों में छा जाओ न
अपनी आँखों में बसा जाओ न
देखो न तुम इस तरह मुझे
हमसफर आ जाओ न
गुनेश्वर
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