Sunday, 1 September 2013



ज्ञान के बिना जीवन व्यर्थ है
मां के बिना किसी का जन्म असंभव है वैसे गुरु के बिना ज्ञान भी प्राप्त नहीं होता।
समस्त विश्व में गुरु का स्थान ईश्वर से भी प्रथम माना गया है
विश्व में कोई भी ऐसा प्राणी नहीं, जिसका कोई गुरु न हो।
गुरु वही है जिसके वचन ह्रदय तक असर करे और व्यक्तित्व का निर्माण कर दे 
एक बेहतर भविष्य के निर्माण में गुरु का विशेष योगदान होता है
गुरु ज्ञान के प्रसार के साथ-साथ समाज के विकास का भी बीड़ा उठाते हैं 
गुरु हमारे जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर लेकर जाते हैं 


क्षणभंगुर  
पर मोह लेती है
ओस की बुँदे


सुमधुर साहित्य
दिखाई देता है
ओस दर्पण बनता
चहुँ और लालित्य
दिखाई देता है
कोतुहल की परिधि में
शीतलता का सानिध्य
दिखाई देता है
कंचन सा लगता
मन अहलादित होता
दिखाई देता है
पर 
क्षणभंगुर होती है
शबनम की बुँदे


गुनेश्वर










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