तुम्हारी आस को
अपनी श्वास देना चाहता हूँ
तुम्हे तुम्हारे होने का
एहसास देना चाहता हूँ ।
नैसर्गिक ही बनी रहो तुम
सहज ही अर्पित
तुम्हे होना चाहता हूँ
एक नया एह्साह देना चाहता हूँ ।
चन्द्रमा की तरह शीतल तुम
सूरज का तांडव न सह पाओगी
तुम्हारे अंदर एक छाँव बन
दरिया की तरह बहाना चाहता हूँ ।
स्निग्ध हो, सुन्दर हो
प्यार का पूरा समंदर हो
मैं तो एक बूंद
मिल तुमसे विशाल होना चाहता हूँ ।
तुम्हारी आस को
अपनी श्वास देना चाहता हूँ
तथापि, यद्यपि किन्तु, परन्तु
की अठखेलियाँ नहीं आती मुझे
ऋतुओं की रातों का अहसास नहीं है मुझको
समर्पण के साथ, सम्पूर्ण हो बन तुम्हारा
रहना चाहता हूँ।
गुनेश्वर
अपनी श्वास देना चाहता हूँ
तुम्हे तुम्हारे होने का
एहसास देना चाहता हूँ ।
नैसर्गिक ही बनी रहो तुम
सहज ही अर्पित
तुम्हे होना चाहता हूँ
एक नया एह्साह देना चाहता हूँ ।
चन्द्रमा की तरह शीतल तुम
सूरज का तांडव न सह पाओगी
तुम्हारे अंदर एक छाँव बन
दरिया की तरह बहाना चाहता हूँ ।
स्निग्ध हो, सुन्दर हो
प्यार का पूरा समंदर हो
मैं तो एक बूंद
मिल तुमसे विशाल होना चाहता हूँ ।
तुम्हारी आस को
अपनी श्वास देना चाहता हूँ
तथापि, यद्यपि किन्तु, परन्तु
की अठखेलियाँ नहीं आती मुझे
ऋतुओं की रातों का अहसास नहीं है मुझको
समर्पण के साथ, सम्पूर्ण हो बन तुम्हारा
रहना चाहता हूँ।
गुनेश्वर
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