दिशाहिन सभ्यता और संस्कृति की पराधीनता
तुम संलग्न हो अपने हिस्से का दूध दुहने
बच्चो को जो परोसोगे {आगे} ,,
तुम्हारे आगे वही थाल सजा देंगे
अच्छा है अच्छा है
सरलता के सपनों मे तुम जी लो आज अपना
विश का संसार दे दो आगे
तुम्हारा आज यम से संघर्ष नहीं करता
और ढ़ोल पीटते ढकोसले मे जीता सच
ठीक है ठीक है
लगता होगा तुम्हें यह पूरा सुख
नग्नता की आँधी मे वासना
युक्त भोजन चाटो और मन को गाँठों
सहज हो अपने संकीर्णता की परिधि मे
उन्मुक्त विचार बाँटो
कल मुह बंद होगा तुम्हारा
अपना कोई स्त्रीलिंग और पुरलिंग
उन्मुक्तता की रस्साकसी मे
खींचता रहेगा खुद को और तुम्हें
असभ्यता के दलदल मे
बुत की तरह रख
न्योतेगा हर क्षण
तब तुम खुश हो जाना
दिशाहीन सभ्यता और संस्कृति के पराधीन श्रोत
गुनेश्वर
तुम संलग्न हो अपने हिस्से का दूध दुहने
बच्चो को जो परोसोगे {आगे} ,,
तुम्हारे आगे वही थाल सजा देंगे
अच्छा है अच्छा है
सरलता के सपनों मे तुम जी लो आज अपना
विश का संसार दे दो आगे
तुम्हारा आज यम से संघर्ष नहीं करता
और ढ़ोल पीटते ढकोसले मे जीता सच
ठीक है ठीक है
लगता होगा तुम्हें यह पूरा सुख
नग्नता की आँधी मे वासना
युक्त भोजन चाटो और मन को गाँठों
सहज हो अपने संकीर्णता की परिधि मे
उन्मुक्त विचार बाँटो
कल मुह बंद होगा तुम्हारा
अपना कोई स्त्रीलिंग और पुरलिंग
उन्मुक्तता की रस्साकसी मे
खींचता रहेगा खुद को और तुम्हें
असभ्यता के दलदल मे
बुत की तरह रख
न्योतेगा हर क्षण
तब तुम खुश हो जाना
दिशाहीन सभ्यता और संस्कृति के पराधीन श्रोत
गुनेश्वर
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