सफर
जब कभी समय मिले
किसी शांत जगह लेट
शुन्य में निहारते हुए
विचारों की श्रृंखला
उमड़ते घुमड़ते हुए दिखाई देंगे
तब माँ का वह आँचल भी याद आएगा
उनकी लोरियां परीकथाएँ,
कितनी विचित्रता लिए होती थीं .
पिता से प्राप्त २५ पैसों से
चना चिरौंजी खरीद
हांथों में बस्ता लिए
सड़क के बांयीं ओर चलते हुए
दिए गए गृह कार्य के
अनसुलझे प्रश्नों का मंथन
किसी बुद्धि-जीवी मित्र की तलाश
फिर उसकी दोनों अन्जुरियां भर
अनसुलझे प्रश्नों को सुलझाने की कला
क्योंकि तुम्हे पिछली बेंत का अहसास
अब तक होगा
जब बचपन के पदचाप
यौवन के दहलीज पर होंगे
तब तुम्हे सारी सृष्टि
दुल्हन की तरह दिखेगी
हौंठो के उपर
काले बालों का गुच्छा
किसी कुमुदनी के लिए
प्रतीक्षा-रत आँखें
फिर प्यार मनुहार
रूठना मनाना
भुतहे काले माकन भी
तब तुम्हे रौशनियों से भरे
जगमगाते महसूस होंगे
कुछ समय पश्चात्
आधुनिकता के लिबास में
परम्परा वादियों के प्रति
वितृष्णा जाग्रत होगी
फिर कुछ क्रदन मंथन
उद्वेलन के बाद
स्वीकार करते हुए प्रतीत होगे
तत्पश्चात
भविष्य के सफ़र में
एक अनजान साथी की तलाश
फिर गठबंधन
नन्हे रणबांकुरों की उपलब्धि
उनकी तोतली जुबान
तुम्हे आकर्षित करेंगी
तब तुम्हे अपना बिता
कल भी याद आएगा
पोतड़ों से जब छुटकारा मिलेगा
तब उनके भविष्य के प्रति
स्वंय को सचेत पाओगे
अपने संचित ज्ञान को
उनकी झोली में डाल
निश्चिन्त हो जाओगे
फिर एक नयी चिंता
समयांतर के पश्चात्
कन्या-दान के लिए तत्पर
अपने निचुड़े हुए शरीर को
तकते हुए मिलोगे
इस अवस्था तक कई
अप्रत्याशित घटनाओं का
भी जीवन में समावेश होगा
किसी आत्मीय के खोने का गम
सालता रहेगा
फिर नाना या दादा बनने की
उत्कंठा लिए जीवन के अंतिम
पड़ाव की ओर अग्रसर होगे
तब तुम्हे किसी लंगड़े की तरह
एक पैर की और आवश्यकता होगी
अंत तुम्हारा एक चिरस्थायी
सुख में समाप्त होगा
जंहा कोई उद्वेलन
कोई संताप न होगा!
गुनेश्वर
जब कभी समय मिले
किसी शांत जगह लेट
शुन्य में निहारते हुए
विचारों की श्रृंखला
उमड़ते घुमड़ते हुए दिखाई देंगे
तब माँ का वह आँचल भी याद आएगा
उनकी लोरियां परीकथाएँ,
कितनी विचित्रता लिए होती थीं .
पिता से प्राप्त २५ पैसों से
चना चिरौंजी खरीद
हांथों में बस्ता लिए
सड़क के बांयीं ओर चलते हुए
दिए गए गृह कार्य के
अनसुलझे प्रश्नों का मंथन
किसी बुद्धि-जीवी मित्र की तलाश
फिर उसकी दोनों अन्जुरियां भर
अनसुलझे प्रश्नों को सुलझाने की कला
क्योंकि तुम्हे पिछली बेंत का अहसास
अब तक होगा
जब बचपन के पदचाप
यौवन के दहलीज पर होंगे
तब तुम्हे सारी सृष्टि
दुल्हन की तरह दिखेगी
हौंठो के उपर
काले बालों का गुच्छा
किसी कुमुदनी के लिए
प्रतीक्षा-रत आँखें
फिर प्यार मनुहार
रूठना मनाना
भुतहे काले माकन भी
तब तुम्हे रौशनियों से भरे
जगमगाते महसूस होंगे
कुछ समय पश्चात्
आधुनिकता के लिबास में
परम्परा वादियों के प्रति
वितृष्णा जाग्रत होगी
फिर कुछ क्रदन मंथन
उद्वेलन के बाद
स्वीकार करते हुए प्रतीत होगे
तत्पश्चात
भविष्य के सफ़र में
एक अनजान साथी की तलाश
फिर गठबंधन
नन्हे रणबांकुरों की उपलब्धि
उनकी तोतली जुबान
तुम्हे आकर्षित करेंगी
तब तुम्हे अपना बिता
कल भी याद आएगा
पोतड़ों से जब छुटकारा मिलेगा
तब उनके भविष्य के प्रति
स्वंय को सचेत पाओगे
अपने संचित ज्ञान को
उनकी झोली में डाल
निश्चिन्त हो जाओगे
फिर एक नयी चिंता
समयांतर के पश्चात्
कन्या-दान के लिए तत्पर
अपने निचुड़े हुए शरीर को
तकते हुए मिलोगे
इस अवस्था तक कई
अप्रत्याशित घटनाओं का
भी जीवन में समावेश होगा
किसी आत्मीय के खोने का गम
सालता रहेगा
फिर नाना या दादा बनने की
उत्कंठा लिए जीवन के अंतिम
पड़ाव की ओर अग्रसर होगे
तब तुम्हे किसी लंगड़े की तरह
एक पैर की और आवश्यकता होगी
अंत तुम्हारा एक चिरस्थायी
सुख में समाप्त होगा
जंहा कोई उद्वेलन
कोई संताप न होगा!
गुनेश्वर
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