Monday, 1 July 2013


सोम का प्रसाद कर
मित्र आज रास कर
शिव का शंखनाद है
डमरू का प्रवाह कर
भाँग का ध्यान हो
मौन का प्रमाण हो
नये-नये राज का
आज पर्दाफाश कर
शंख का नाद कर
पिपासा आज राख़ कर
राख़ मे प्रताप कर
शिव का ही जाप कर
जाप का प्रमाण कर
लोक का निर्माण कर
मनुष्य का मान कर
गरल तू कंठ धर
वीणा का गान कर
गान का गुणगान कर
शिव का सम्मान कर
मोह अपना त्याग कर
त्याग मे प्रवाह कर
प्रवाह मे ही राह कर
राह मे न कराह कर
कराह से विवाह कर
विवाह पे न क्षोब कर
“मैं” को खुद से दूर कर
घमंड का विनाश कर
भभूत का प्रसाद कर
भूत भूल कर
सौहार्द का स्नान कर
भिविष्य पे आँख रख
आज तू शिवरात्र कर
आज तू शिवगान कर
शिवरात्र कर शिव गान कर
“””गुनेश्वर”””

No comments:

Post a Comment