जब-जब देखा है तुम्हें
पाया है सुकून मैंने
सुनी ज़िंदगी मे
खुशियों की बहारें आ गई
सौन्दर्य तुम्हारा मुझे
बांधता है
भवनाएं समीप लाती हैं
लिखने को जी करता है
कुछ नया ...................जाने क्या
सिर्फ तुम्हारे लिए
अंत नहीं है उस कुछ का
जब भी देखता हूँ तुम्हें
कल्पनाएं यथार्थ लगती हैं
वास्तविकता के करीब
जी करता है हमेशा
भावनाओं के आदान प्रदान का
आवाज सुनते हुए जीने का
आँचल से तुम्हारी
अठखेलियाँ करने को
जी करता है .......||||
तुम्हें बहुत करीब महसूस
करता हूँ
ऐसा लगता है
मै, मै न होता
तुम, तुम न होती
एक हंसी सी खुशी
अपने सनीध्य मे
बस और कुछ नहीं
बस और कुछ नहीं
सिर्फ तुम्हारे लिए
गुनेश्वर
पाया है सुकून मैंने
सुनी ज़िंदगी मे
खुशियों की बहारें आ गई
सौन्दर्य तुम्हारा मुझे
बांधता है
भवनाएं समीप लाती हैं
लिखने को जी करता है
कुछ नया ...................जाने क्या
सिर्फ तुम्हारे लिए
अंत नहीं है उस कुछ का
जब भी देखता हूँ तुम्हें
कल्पनाएं यथार्थ लगती हैं
वास्तविकता के करीब
जी करता है हमेशा
भावनाओं के आदान प्रदान का
आवाज सुनते हुए जीने का
आँचल से तुम्हारी
अठखेलियाँ करने को
जी करता है .......||||
तुम्हें बहुत करीब महसूस
करता हूँ
ऐसा लगता है
मै, मै न होता
तुम, तुम न होती
एक हंसी सी खुशी
अपने सनीध्य मे
बस और कुछ नहीं
बस और कुछ नहीं
सिर्फ तुम्हारे लिए
गुनेश्वर
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