Monday, 1 July 2013

सामाजिक चेतना का

ठेका ले रखा है,
सामाजिक चेतना का
कलफ लगे कपड़ों मे
घर से निकालने वालों
उनमे से मैं भी एक,
मेरे साथ और कई
आओ शुरवात मुझसे ही करो
दो रसीद करो और शपथ दिलाओ
""मैं समस्त ईमानदारों अच्छे इन्सानो
को हाजिर नाजिर जानकार
उनके सर पर हाथ रख कर शपथ लेता हूँ की ...........
सामाजिक चेतना क्या होता है, क्यों होना चाहिए
इस पर पूर्ण आस्था से सोचुंगा और व्यवहार मे
लाने का प्रयत्न करूंगा ||

इससे पहले कुछ रुके हुए काम है
कुछ गणमान्य व्यक्तियों की
अंजुरियाँ भरनी है |||

उसके बाद आ जाता हूँ

समस्त ईमानदार तब तक मर चुके होंगे

सब चाहते है ज़िंदगी सलीके से जिया जाय
पर सामाजिक व्यवस्था, मुक भी नहीं, बधिर भी नहीं
[ सिर्फ लोलुप है - सिर्फ एक ही इल्ज़ाम है," पर लंबा है " ]

गुनेश्वर

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