किसान
किसान
अहसासों के दरिया में
समंदर की जरुरत है।।
मेरी जरुरत से पहले
उनकी जरुरत है
उन्हें मत भूलना जिन्हें
हमारी जरुरत है ।।
वो किनारे पर खड़े
निपट अकेले
नग्न सच के साथ
पत्थर हाथों मैं है
पर फेकने के लिए
जज्बे की जरुरत है
उन्हें मत भूलना जिन्हें
हमारी जरुरत है ।।
क्या करें कहाँ जाएँ
पेट पीठ से चिपकाए बैठे हैं
क्या तो उन्हें बताएं
कैसे तो उन्हें समझाएं
उन्हें कब कब
कैसी कैसी जरुरत है
क्या तो हम समझे
उन्हें मत भूलना जिन्हें
हमारी जरुरत है ।।
थोडा ही सही
बाँट लेना
अपना सुख
सूखे की स्थिति
तो सुधर जाएगी
दोनों के पास
बराबर हो जायेगा सुख
उन्हें मत भूलना जिन्हें
हमारी जरुरत है ।।
कई सदियों से
चली आ रही परम्परों के
निर्वाहक तो वो ही हैं
हम तो केवल
आस्था वादी विचरों के प्रति
समर्पित भाव ही रखतें है
फिर क्यों देखा जाता है
उन्हें सबसे हट कर
उन्हें मत भूलना जिन्हें
हमारी जरुरत है
अहसासों के दरिया में
समंदर की जरुरत है ।।
गुनेश्वर
किसान
अहसासों के दरिया में
समंदर की जरुरत है।।
मेरी जरुरत से पहले
उनकी जरुरत है
उन्हें मत भूलना जिन्हें
हमारी जरुरत है ।।
वो किनारे पर खड़े
निपट अकेले
नग्न सच के साथ
पत्थर हाथों मैं है
पर फेकने के लिए
जज्बे की जरुरत है
उन्हें मत भूलना जिन्हें
हमारी जरुरत है ।।
क्या करें कहाँ जाएँ
पेट पीठ से चिपकाए बैठे हैं
क्या तो उन्हें बताएं
कैसे तो उन्हें समझाएं
उन्हें कब कब
कैसी कैसी जरुरत है
क्या तो हम समझे
उन्हें मत भूलना जिन्हें
हमारी जरुरत है ।।
थोडा ही सही
बाँट लेना
अपना सुख
सूखे की स्थिति
तो सुधर जाएगी
दोनों के पास
बराबर हो जायेगा सुख
उन्हें मत भूलना जिन्हें
हमारी जरुरत है ।।
कई सदियों से
चली आ रही परम्परों के
निर्वाहक तो वो ही हैं
हम तो केवल
आस्था वादी विचरों के प्रति
समर्पित भाव ही रखतें है
फिर क्यों देखा जाता है
उन्हें सबसे हट कर
उन्हें मत भूलना जिन्हें
हमारी जरुरत है
अहसासों के दरिया में
समंदर की जरुरत है ।।
गुनेश्वर
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